हौसला रक्खो

पहाड़ो से टकराने का हौसला रक्खो और उम्मीदों के सहारे चलते रहो
जब भी कुछ बड़ा करने के लिए निकलोगे तुम्हे रोकने के लिए बहुत सी
 तकलीफे आएंगी इतना ज्यादा दर्द और तकलीफ होगा की   तुम्हारा
 भगवान पे से विस्वास डगमगा जायेगा पर यही वक़्त है खुद पर भरोसा
 करने का,  हमारा विस्वास तभी कमजोर होता है जब हम दुसरो पर भरोसा करते है
या फिर अपने काम मे लापरवाही करते है अपने काम से कभी लापरवाही न करो
और अगर तुम्हे किसी पे भरोसा करना पड़ रहा हो तो अपने अंदर ये बात रख
लेना की अगर ओ तुम्हे आधे रास्ते मे छोड़ भी देता  तो भी तुम अपनी मंजिल को
नहीं छोड़ोगे कोई तरीका भी तुम्हारे पास होना चाहिए नहीं कोई तरीका हो तो भी
फिर से एक नयी शुरुआत करने की हिम्मत होनी चाहिए कोई नहीं साथ दे
फिर भी शुरुआत करनी चाहिए क्यों की अगर एक बार शुरुआत हो जाती है तो कुछ
न कुछ जरूर रास्ते नजर आने लगते है
लोगो की सुन के रुकना गलत बात है क्यों की उन लोगो के पास ऐसा कोई एक्सपेरिएंस
नहीं है जिसके दम पर ओ तुम्हे रोकते है उन्हें तो मंजिल से ज्यादा मंजिल मे होने वाले दर्द
दिखने लगते हैं इंसान को ओहि मिलता हैं जिसपे ओ ज्यादा गौर करता हैं इसलिए अपनी
मंजिल को गौर से देखो और लड़ते रहो दर्द के बारे मे मत पूछो दर्द जिंदगी मे कॉमन हैं
इसके बिना जिंदगी  नहीं हैं

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